Sarangpur Hanuman,BAPS (सारंगदेव हनुमानसारंगपुर ( सालन्ग्रपुर )
परिचय तथा परिस्थिति :
सारंगपुर हनुमान अहमदाबाद से 160 km. की दुरी पर वड़ताल नामक जगह पर स्थापित है l निकटतम हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन अहमदाबाद है l यहाँ पहुँचने के लिए टेक्सी के अलावा बस सुविधा भी उपलब्ध है l सारंगपुर हनुमान स्वामीनारायण मन्दिर द्वारा बनाया गया है, यह इकलोता मन्दिर है जहाँ पर स्वामीनारायण या कृष्ण जी की स्थापना के बजाय हनुमान जी की स्थापना की गई है l इस मन्दिर की स्थापना सन 1824 में स्वामी सद्गुरु गोपालानंद जी ने हनुमान की मूर्ति को स्थापित कर की थी l हनुमान जी की यह प्रतिमा लोगों के कष्टों का हरण करती है, इसलिए इसे कष्टभंजन हनुमान कहा जाता है l
यह भगवान हनुमान को समर्पित एक अत्यंत प्रसिद्ध और सिद्ध हिंदू मंदिर है, जिसे श्री कष्टभंजन देव हनुमानजी मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह गुजरात के बोटाद जिले के सारंगपुर गांव में स्थित है और स्वामीनारायण संप्रदाय के अंतर्गत आता है।
भगवान स्वामीनारायण ने अपने जीवनकाल में कुल 6 मुख्य मंदिरों का निर्माण करवाया था
- अहमदाबाद (पहला - 1822)
- भुज (1823)
- वडताल (1824)
- धोलेरा (1826)
- जूनागढ़ (1828)
यहां हनुमान जी की मूर्ति एक मजबूत आकृति के रूप में निर्मित है, जो एक राक्षसी को अपने पैर के नीचे कुचल रही है l ( एक किवदंती के रूप में यह भी प्रचलित है कि एक समय शनिदेव अपने भक्तों पर काफी जुल्म कर रहे थे, तब लोगों ने हनुमान जी से शनि देव के प्रकोप से बचने के लिए प्रार्थना की, हनुमान जी के क्रोध को देखते हुए शनि ने स्त्री का रूप धारण कर लिया, क्योंकि शनी को मालूम है, हनुमान जी बालब्रह्मचारी है, और वह स्त्री को हाथ नहीं लगायेगे, यही सोच कर उन्होंने हनुमान जी के चरणों में शरण ली l )
1899 में वड़ताल के कोठारी गोवर्धनदास ने शास्त्री यज्ञपुरुषदास को इसके जीर्णोद्धार का काम सौंपा और अधिक से अधिक भूमि का अधिग्रहण किया l यज्ञपुरुषदास ने फिर 1907 में इससे अलग होकर बोचानवासी अक्षर पुरशोतम स्वामीनारायण ( BAPS) संसथान बनाया । गोवर्धनदास ने तब सारंगपुर के मंदिर का एक नया महंत नियुक्त किया। तब से अब तक वड़ताल गढ़ी ने मंदिर में अतिरिक्त सुधार और भवनों का निर्माण कार्य किया है।
ऐसा माना जाता है कि उस समय मंदिर के निर्माण के लिए भूमि तत्कालीन ब्रिटिश सरकार (ईस्ट इंडिया कंपनी) द्वारा दान की गई थी।
(बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) द्वारा निर्मित मंदिर अपनी भव्यता, नक्काशी और आध्यात्मिक वातावरण के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। यह संस्था वर्तमान में दुनिया भर में 1,300 से अधिक मंदिरों का संचालन करती है।
प्रमुख बीपीएस (BAPS) मन्दिर
- स्वामीनारायण अक्षरधाम, दिल्ली: भारत के सबसे बड़े मंदिर परिसरों में से एक, जो 2005 में खुला था। यहाँ भारत की प्राचीन कला, संस्कृति और आध्यात्मिकता की झलक मिलती है।
- अक्षरधाम, गांधीनगर (गुजरात): यह 1992 में स्थापित हुआ और पत्थर की नक्काशी और लेजर/वॉटर शो के लिए जाना जाता है।
- BAPS हिंदू मंदिर, अबू धाबी (UAE): मध्य पूर्व का यह पहला पारंपरिक हिंदू पत्थर का मंदिर है, जिसका उद्घाटन फरवरी 2024 में हुआ। इसमें 7 शिखर हैं जो UAE के 7 अमीरात का प्रतीक हैं।
- अक्षरधाम, रॉबिन्सविले (न्यू जर्सी, USA): अक्टूबर 2023 में उद्घाटित, यह एशिया के बाहर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है।
- नेस्डेन मंदिर, लंदन: यूरोप का पहला पारंपरिक पत्थर का मंदिर, जिसे अपनी जटिल वास्तुकला के लिए जाना जाता है।
मंदिरों की मुख्य विशेषताएँ
ये मंदिर शिल्प शास्त्र के प्राचीन सिद्धांतों पर आधारित हैं। इनमें अक्सर स्टील या लोहे का उपयोग नहीं किया जाता है।
"किंग ऑफ सारंगपुर"
नई बनी प्रतिमा की मुख्य विशेषताएँ:
- यह प्रतिमा 54 फीट ऊंची है और 48 फीट ऊंचे आधार (पेडस्टल) पर खड़ी है।
- इस विशाल मूर्ति का कुल वजन लगभग 30,000 किलो (30 टन) है और इसे पंचधातु (मिश्रित धातुओं) से बनाया गया है।
- हनुमान जी के हाथ में 27 फीट लंबी गदा है। यह प्रतिमा इतनी विशाल है कि इसे लगभग 7 किलोमीटर की दूरी से भी देखा जा सकता है।
- इसका अनावरण भारत के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 6 अप्रैल 2023 को हनुमान जयंती के अवसर पर किया गया था।
जब हम गए थे तब यह मूर्ति नहीं थी l
ये 18 दिसम्बर 2018 की बात है l क्योंकि हम लोग diu fort जा रहे थे, तो ये हमारे रास्ते में था l ( वैसे भी रास्ते में जो भी दर्शनीय स्थल आते जा रहे थे, हम कुछ देर के लिए वहां जरुर रुक रहे थे l ) आज हमारा रात्रि विश्राम सारंगपुर में ही होना था, तो यहाँ के दर्शन तो बनते ही थे l हम यहाँ लगभग शाम के 9.00 बजे पहुंचे l सबसे पहले हमने अथिति गृह में कमरे लिए , और सोने चले गए l खाना हम इस्कोन में पहले ही खा चुके थे l यहाँ बहुत बड़ी धर्मशाला बनी हुई है, जिसे अतिथि गृह कहा जाता है l शायद खाने का भी प्रबन्ध है, मगर हम देर से पहुंचे और खाना खा कर भी आये थे, तो ध्यान न दिया l
रुकने के लिए मंदिर परिसर में जो धर्मशाला है वह Sarangpur Trust Dharmashala के नाम से है l इस की ऑनलाइन बुकिंग भी हो जाती है l
अगले दिन ( 19 दिसम्बर 2018 ) सुबह हम 7.00 बजे नहा धो कर निकले, हमने सबसे पहले हनुमान जी के दर्शन किए फिर सारा परिसर घुमा l यह बहुत बड़ी जगह में बना विशाल परिसर है l एक तरफ धर्मशाला है, उसके बाँई ओर हनुमान जी मन्दिर है, सामने की तरफ भव्य स्वामीनारायण मन्दिर है, उसके साथ ही कुछ दुरी पर प्रमुख स्वामी जी का समाधि स्थल है, जिसे स्मृति मन्दिर नाम दिया गया है l प्रमुख स्वामी जी का जन्म 7 दिसम्बर 1921 को हुआ था और उनका निर्वाण 13 अगस्त 2021 को हुआ l जबकि उन्हें समाधि दी गई 17 अगस्त 2021 को l प्रमुख स्वामी भगवान स्वामीनारायण के पांचवें अनुगामी थे
वह 1940 में शास्त्री महाराज के शिष्य बने l
उन्होंने 1100 सौ से अधिक मन्दिर बनवाए l
900 से अधिक साधुओं को दिक्षित किया l
भारत और विदेशों के 17,000 से अधिक शहरों और गाँव का भ्रमण किया l
लोगो द्वारा लिखे 7.60,000 पत्रों का जवाब दिया l
8,10,000 से अधिक लोगों को मिले और व्यक्तिगत रूप से परामर्श दिया l
यह सारी जानकारी हमने वहां मिले एक स्वामी जी से एकत्र की थी, तब गूगल बाबा इतना ज्ञान नहीं बांटता था l उसके बाद हम निकल पड़े diu के लिए रास्ते में और क्या कुछ मिलेगा तो देखते हैं l
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| सारंगदेव अथिति गृह : जहाँ हमने रात गुजारी |
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| प्रांगन में स्थापित नीलकंठ महादेव |
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| समयसारणी |
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| भव्य मुख्यद्वार |
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| पत्थर की वह शीला जिस पर स्वामी जी बैठ कर नहाते थे |
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| स्वमी जी का रथ छत से लटका हुआ |
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| स्वमी जी का कक्ष |
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| सुंदर नक्काशी दार दरवाजा |
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| हनुमान जी की धातु की मूर्ति :मुहँ में नारियल डालो हाथ से प्रसाद रूप में लो |
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| BAPS मंदिर के दो चित्र |
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| मंदिर के बाहर बनी हुई मूर्ति |
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| स्मृति मंदिर : प्रमुख स्वामी जी का समाधि स्थल |
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| BAPS मंदिर सफेद रंग में और सुनहरी रंग में है अथिति भवन |
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| कष्ट भंजन अतिथि भवन की एक झलक |
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| स्वामी नारायण अतिथि भवन |
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सेल्फी : जिसमे दांया बांया हो जाता है फोटो गूगल से साभार क्योंकि जब हम गए थे तब यह नहीं थी |


















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