चुड़ेल माता मन्दिर
परिचय तथा परिस्थिति :
यह मन्दिर गुजरात के पाटन जिले के कुंघेर (Kundher) गाँव में स्थित है l यह पुरे भारतवर्ष में एक प्रसिद्ध और अनोखा धार्मिक स्थल है। यह मंदिर पाटन शहर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और इसे स्थानीय रूप से "कुंघेर का उच्च न्यायालय" (High Court of Kungher) भी कहा जाता है, क्योंकि भक्त यहाँ न्याय की गुहार लगाने आते हैं।
यहाँ पर माताजी को न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। भक्तों का विश्वास है कि जो चीजें कहीं नहीं मिलतीं या जिन लोगों को न्याय नहीं मिलता, चुड़ेल माता उनकी सहायता करती हैं।
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती है। इसके बजाय, यहाँ एक अखंड ज्योति (जीवित ज्वाला) की पूजा की जाती है, जो कई वर्षों से निरंतर प्रज्वलित
लोक कथाओं के अनुसार, लगभग 250 साल पहले श्री रायचंददास पटेल ने केवल 7 ईंटों से एक वरखाड़ी के पेड़ के नीचे माताजी की स्थापना की थी।
जब हम मेहसाणा से गुजर रहे थे, तो शैलेश भाई ने हमसे पुछा कि क्या कभी आपने चुड़ेल को देखा है या माता का मन्दिर सुना है, हमारा जवाब न था l तब उन्होंने कहा आज आपको वह स्थान दिखा ही देते हैं l जब हम इस जगह पहुंचे तो शाम के 7.30 बज चुके थे और अँधेरा भी हो चूका था l उस समय सिर्फ एक आदमी यहाँ पर था, जो मन्दिर के अन्दर पूजा कर रहा था l हम जब तक भी यहाँ रुके वह आदमी पूजा में ही व्यस्त रहा l हम लोगों ने अंदर प्रवेश नहीं किया l ( मधु जी ने कहा जब अपने वाली साथ है तो दूसरी की पूजा करना पाप है ) यहाँ पर प्रशाद चढ़ता है या नहीं वो तो नहीं मालूम हुआ, मगर बाहर रस्सियों पर बहुत से चुन्नी और बिना सिले कपडे लटके हुए थे जो लोग मन्नत पूरी होने पर या मन्नत करते समय वहां चढाते हैं l जैसे कई जगह हमने पेड़ पर धागा बंधा हुआ देखा, गोलू देवता के मन्दिर में घंटियों को बंधे देखा, कई मंदिरों में जानवरों की बलि दी जाती है ऐसे ही यहाँ माता को बिना सिले वस्त्र भेंट किये जाते हैं l इस मन्दिर के बारे में हमारे चालक व गुइड शैलेश भाई ने जो जानकारी दी वह इस प्रकार है l
यह मंदिर भक्तों के लिए 24 घंटे खुला रहता है।
यहाँ रविवार और मंगलवार को भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
खास दिनों में यहाँ भोजन (प्रसाद) की व्यवस्था भी उपलब्ध रहती है।
गुजरात में कुंघेर के अलावा अन्य स्थानों पर भी चूडेल माता के मंदिर स्थित हैं
- नेनपुर (Nenpur): अहमदाबाद के पास स्थित एक अन्य जागृत स्थान।
- वाल्थेरा (Valthera): यहाँ भी माताजी का प्रसिद्ध मंदिर है।
- दीओदरडा (Diodarda): सिद्धपुर हाईवे के पास स्थित।
हम लोग यहाँ पर मुश्किल से 15 मिनट रुके, आज हमारा सारंगपुर तक पहुँचने का लक्ष्य था l और वैसे भी यहाँ कुछ खास देखने वाली कोई जगह थी भी नहीं, बस एक छोटा सा कमरा टाइप मन्दिर था जो कुछ मान्यताओं के आधार पर विख्यात है जबकि बाहर के लोग इस बारे में अधिक जानकारी ही नहीं रखते l हम तो इस लिए यहाँ रुके की यह हमारे रास्ते में पड़ता था, और हमारे चालक इस बारे में जानते थे, वरना कोई भी बाहरी व्यक्ति यहाँ नहीं जाता इसी लिए यहाँ प्रसाद आदि की कोई दुकान या व्यवस्था नहीं है l
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| केवडिया से सारंगपुर के रास्ते में |
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| जंगल में बहुत सारी भेड़ें |
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| गुजरात में ऐसे टैंकर अक्सर नजर आते हैं |
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| माही नदी पर बना पुल |
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| हमे वसाड वाली सड़क पर जाना है |
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| चलती कार से लिया गया किसी मंदिर का चित्र |
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| सूर्य मंदिर: बोरसाद |
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| बस बाहर से ही फोटो लिए |
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| जय भोलेनाथ |
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| जहाँ भी ऐसी फोटो दिखे समझो चुडेल माँ का स्थान है |
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| मन्दिर में दो घड़ियाँ लगी है दोनों ही बंद है |
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| आरती की तैयारी हो रही है |














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