Diu Fort : gujarat Travel ( दीव किला : गुजरात यात्रा )
परिचय तथा परिस्थिति :
19 दिसंबर, 1961 को "ऑपरेशन विजय" के अंतर्गत पुर्तगाली शासन से मुक्ति के बाद गोवा, दमण एवं दीव संघ प्रदेश के रूप में भारत सरकार का अंग बने थे । तथा 30 मई 1987 को गोवा के राज्य बनने के बाद, दमण और दीव एक अलग संघ प्रदेश बने । दमन और दीव अरब सागर के जलडमरू मध्य में स्थित है। 26 जनवरी 2020 को दादरा-नगर हवेली और दमन दिव के विलय के बाद दमन को संयुक्त राजधानी घोषित किया गया l
दिव पहुँचने के लिए निकटतम रेलवे जंक्शन वेरावल है, जो दीव से 90 किमी दूर है l इसके अलावा, देलवाड़ा में एक मीटर गेज स्टेशन भी है, जो दीव से सिर्फ 8 किमी दूर है, यह जूनागढ़ और वेरावल को देलवाड़ा रेलवे स्टेशन से जोड़ती हैं। सड़क द्वारा यहाँ पहुँचने के लिए वडोदरा: 595 km., दमण: 768 km., अहमदाबाद: 370 km. और मुंबई: 950 km. है । गुजरात की सरकारी बस सेवा के साथ-साथ निजी ऑपरेटर की बसें मुंबई, अहमदाबाद, राजकोट, सूरत, वडोदरा, भावनगर आदि से दीव के लिए चलती हैं। दीव के नागवा में एक हवाई अड्डा है, जो मुंबई से दीव के लिए एक उड़ान द्वारा जुड़ा हुआ है। हेलिकॉप्टर सेवा दमण से दीव तक संचालित होती है।
पश्चिम के पर्यटन स्थलों में दीव का किला एक प्रमुख स्थान रखता है, और जब से तो गुजरात में शराबबंदी हुई है, तब से तो यह गुजरात की शराब राजधानी बन गई है l सप्ताहांत में तो यहाँ होटल में कमरे मिलना मुश्किल हो जाता है, और रेट भी बढ़े हुए होते हैं l गोवा की तरह खुलेआम तो नहीं, मगर यहाँ खूब पियक्कड़ मिलते हैं l
दीव का किला, सौराष्ट्र के जलडमरू मध्य के दक्षिणी किनारे पर स्थित एक विशाल और भव्य संरचना है l यह 56,736 वर्ग km. में बना, और समुद्र तल से 26.40 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है । ( आंकड़े गूगल से साभार ) ( मगर सामने देखने पर यह ऊँचाई किले की प्राचीर की हो सकती है l यह किला पुर्तगालियों द्वारा निर्मित एशिया में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखता था l इस किले के अन्दर शस्त्र , बारूद , खाद्यान्न और पानी के संरक्षण की सम्पूर्ण व्यवस्था थी l साथ ही संकट के समय भागने के लिए कई भूमिगत गुप्त रास्ते भी थे, जिनका अब महत्व समाप्त हो चूका है l दिव किले से समुद्र और उसके आसपास के क्षेत्रों का शानदार दृश्य दिखाई देता है । यह तीन तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है और चौथी तरफ एक नहर से जुडा हुआ है। दिव किले के निर्माण का आधार था, एक रक्षा समझौता, जब मुगल सम्राट हुमायूं ने बहादुरशाह पर आक्रमण किया था, तब गुजरात के सुल्तान बहादुरशाह और पुर्तगालियों के बीच एक समझौता हुआ था l दिव किले का निर्माण 1535 से 1541 के मध्य में डी. नूनो दा कुन्हा द्वारा किया गया था और 1546 में डी. जोआओ दा कास्त्रो द्वारा फिर से पुननिर्माण किया गया l तब इस विशाल किले में रईसों के लिए निवास स्थान, गोदाम और सैनिकों के लिए बैरक, हथियार और गोला-बारूद का भण्डार घर, जेल और चर्च थे l किले में कई बुर्ज थे, तीन बुर्ज बाहरी दिशा में जबकि चार बुर्ज अन्दर की ओर स्थापित है, इस के सिवा तीन और बुर्ज पश्चिमी दिशा में भी हैं l इन सभी बुर्जो का नामकरण इसाई संतों के नाम पर रखा गया था, जैसे “बैस्टियन सेंट डोमिंगोस”, “बैस्टियन सेंट निकोलौ”, “बैस्टियन सेंट फिलिप”, “बैस्टियन कौरका”, “बैस्टियन कैवेलिरो”, “बैस्टियन सेंट जेम्स” , बैस्टियन चैटो (फ्लैट)”, “ बैस्टियन सेंट जॉर्ज”, “बैस्टियन सेंट तेरेज़ा”, “ बैस्टियन सेंट लुसी”। उन सभी में सबसे पुराना सेंट , सेंट जॉर्ज का माना जाता है। जिस समय इसका निर्माण हुआ होगा, इसकी भव्यता शानदार रही होगी l अब तो समुद्र की खारी हवा ने पत्थरों को खाना शुरू कर दिया है l ( समुन्दर के के किनारे जितने भी पत्थरों के निर्माण है, सब जगह अब पत्थर खरने शुरू हो चुके है )
हम कल शाम को 8.30 बजे दिव पहुचे थे, हमारा ठिकाना था (Hotel palacio de diu ) आज 20 दिसम्बर 2018 है, हम लोग सुबह लगभग 9.30 बजे होटल से निकले और सीधे दिव किला का रुख किया, जो यहाँ से मात्र 20 मिनट दूर था, गाड़ी से उतरे तो सामने एक मेहराबदार प्रवेश द्वार था, जिसके टॉप पर एक आले में बड़ा सा घंटा लगा हुआ है, और गेट के तौर पर भारी भरकम लकड़ी के दो पल्ले वाला दरवाजा, जिसमे लोहे के तेज भाले नुमा बूंदे लगे हैं, ताकि कोई हाथी आदि भी इसे टक्कर मार कर तोड़ न सके l दांई ओर सुपरिंटेंडेंट ऑफ़ sub jail का कार्यलय है, जिसके बाहर एक बड़ा सा घंटा जमीन पर रखा है, जिसका टांगने वाला कुंडा टुटा हुआ है, घंटे पर जीजूस क्रॉस और 1720 उकेरा हुआ है, तथा इसके चारों तरफ लोहे के बड़े- बड़े भारी गोले रखे हुए हैं l बाँई ओर कुछ खण्डहर हो चुके कमरे में छोटी धकेलने वाली तोपें रखी है जो शायद आठ-दस होंगी l
मुख्य किले से बाहर समुन्दर की तरफ एक पक्का चबूतरा बना हुआ है, जहाँ सभी लोग फोटो खींचने जा रहे थे, हम भी चले गए l ऐसा लगता है यह स्थान नाव की बोर्डिंग के लिए बनाया गया है l क्योंकि मुख्य किले की दिवार के पास पानी काफी उथला है l किले के ऊपर काफी चौड़ी प्राचीर है, जिसके उपर चारों तरफ स्थापित विशाल तोपें और लोहे के विशाल भारी गोले आज भी इसके महान राजसी होने का अहसास करवाते हैं l मगर हर तरफ घास और झाड़ियाँ उगी हुई है l हमने जितने भी पुरातत्व विभाग के अधीन स्थल देखे हैं, हर जगह साफ-सफाई की कमी और अव्यवस्था ही देखि है l मेरा मानना है, आप एक टिकट रखें, उससे जितना भी फण्ड अर्जित होता है, उससे व्यवस्था बनाएं रखें 50-100 रूपये हर पर्यटक दे देता है l किले पर एक अब लाइट हाउस भी है, जो मछुआरों और जेल के लिए संकेत के रूप में कार्य करता है। किले के पीछे दो चर्च बने हुए हैं, जो अभी भी देखने में सुन्दर लगते हैं l जिनमे एक चर्च का नाम सेंट पाल चर्च है, जो किले से 500 मीटर दूर है, इसका निर्माण भी पुर्तगालियों ने 1601 से 1610 के मध्य में किया था, यह आज भी चालू हालत में है, यहाँ आज भी प्रार्थना होती है l दूसरा जिसे हम चर्च समझ रहे थे, सेंट थॉमस चर्च है, जिसे अब संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया है l दिव किले के पास एक शौपिंग बाजार भी है, जैसा की हर टूरिस्ट प्लेस पर होता है l यहाँ हमने एक-एक हैट ख़रीदा, कुछ धुप से बचाव के लिए कुछ फैशन के लिए l यहाँ आस-पास कुछ और दर्शनीय स्थल भी है, जैसे गंगेश्वर महादेव, आईएनएस खुखरी स्मारक और नागोआ समुन्दर तट l
हम यहाँ लगभग दो घन्टे रुके, उसके बाद आगला पड़ाव था, गंगेश्वर महादेव जबकि आज का हमारा लक्ष्य सोमनाथ तक पहुँचने का था l
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| दीव किले का प्रवेश द्वार |
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| किले के बाँई ओर लाइट हाउस और नाव बोर्डिंग स्थल |
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| समुद्र के रास्ते किले में दाखिल होने का स्थान |
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| बलुआ पत्थर जो समुद्र के खारेपन की वजह से गलने लग गये हैं |
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| गुजरात और दीव को जोड़ने वाला पुल |
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| लकड़ी व् लोहे से बना किले का मुख्यद्वार |
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| संघ प्रदेश दीव का उप कारागार |
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| ऐसे बहुत से चिन्ह है जो इसकी भव्यता का बखान करते हैं |
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| उप कारागार ऑफिस के बाहर विशाल घंटा व् लोहे के गोले |
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| अस्तित्व बचाए रखना भी हौसले की मिसाल है |
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| केवेलैरो लाइट हाउस |
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| यहाँ पर 8 छोटी पोर्टेबल तोप रखी गई है |
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| किले के उपरी भाग का सारा पानी यहाँ इक्कठा होता था |
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| जंगली बेर : जो गुजरात में बहुतायत में पाए जाते हैं |
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| एक ही लाइन में, निशाना समुद्र |
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| यह दोनों चित्र निचे वाले तीसरे चित्र से सम्बन्धित है |
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| ऊपर का पहला चित्र इसके द्वार पर अंकित है , जबकि दूसरा इसके अन्दर का है |
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| हमे यहाँ जाने का रास्ता नहीं मिला |
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| समुद्री लहरों का प्रचंड वेग किनारों की परवाह नहीं करता |
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| निर्मल वर्मा,मधु कँवर , केदार वर्मा |
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| जमीन की तरफ यह गहरी खाई दुश्मनों से रक्षा करती थी |
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| दूर समुद्र में मछली पकड़ने वाली नाव |
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| संत थॉमस चर्च |
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| संत पॉल फ्रांसिस चर्च |
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| संत फ्रांसिस व् संत थॉमस चर्च दीव किले की प्राचीर से |
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| खारे पानी की हवाओं ने यहाँ तक मार की है |
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| तोप तो तोप ही होती है |
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| किले से चर्च के रास्ते में |
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| संत पॉल, या संत फ्रांसिस चर्च : बाहर से |
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| संत पॉल, या संत फ्रांसिस चर्च : अंदर से |
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| कुछ अलग तरह की नाव |
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| अरे मैं तो साला साहब बन गया |
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| लाइट हाउस पर सेल्फी |



































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