मणि लक्ष्मी मन्दिर
परिचय तथा परिस्थिति
मणि लक्ष्मी मन्दिर एक जैन तीर्थ मन्दिर है जो माता- पिता को समर्पित है l यह गुजरात के दादोह से अहमदाबाद जाने वाले रास्ते पर दाहोद से 150 km और अहमदाबाद से 83 km की दुरी पर स्थित है ।
पालीताणा जाने वाले सभी तीर्थ यात्री मणि लक्ष्मी स्थिति जैन मंदिर दर्शन हेतु अवश्य जाते हैं।
सफेद संगमरमर पत्थर से निर्मित मंदिर भव्य, सुंदर नक्काशी एवं विशाल बगीचे के लिए प्रसिद्ध है।
बगीचे में बच्चों के खेलने हेतु झुले, फिसल पट्टी व एवं चकरी की बहुत शानदार व्यवस्था है जो कि बच्चों का मन मोह लेती है।
यह मंदिर 23वें जैन तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित है और इसकी स्थापना 1990 में हुई थी। मंदिर परिसर 18,000 वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है, और इसे पारंपरिक जैन स्थापत्य शैली में बनाया गया है। इस मन्दिर का निर्माण सौराष्ट्र के काठियावाड़ के जैन परिवार ने अपने माता-पिता (मणिलाल भाई व् सौभाग्या बेन ) की याद में किया है l
हमे खेद रहेगा कि हम यहाँ शाम को अँधेरे में पहुंचे, वर्ना इसकी खुबसुरत वास्तुकला के अद्भुत स्थापत्य सौंदर्य और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को और भी अच्छे ढंग से अवलोकन कर सकते थे l
मंदिर के अग्रभाग पर जटिल नक्काशी, विस्तृत मूर्तियां और सुरुचिपूर्ण ढंग से निर्मित स्तंभ जैन वास्तुकला की कलात्मक उत्कृष्टता का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। कमल की नक्काशी से लेकर देवी-देवताओं की आकृतियों तक, मंदिर का हर कोना जैन धर्म के प्रतीकों से सुशोभित है,
मंदिर की बनावट देख कर वृन्दावन का प्रेम मन्दिर याद आता है, लगभग उसी तरह का वास्तु यहाँ देखने को मिला l यह पूरा मन्दिर और समस्त परिसर सफ़ेद संगमरमर के पत्थरों से बना है इसमें भी शायद सीमेंट और लोहे का प्रयोग नहीं हुआ है l (शायद इसलिए लिखा कि हम अँधेरे में सटीक अंदाजा नहीं लगा पाए) मणि लक्ष्मी जैन तीर्थ गुजरात के सबसे दर्शनीय और आध्यात्मिक रूप से मनमोहक मंदिरों में से एक है। स्थानीय लोग इसे आम बोलचाल की भाषा में माता-पिता मन्दिर के नाम से ही संबोधित करते है l मन्दिर के बाहर बगीचे में पिता मणिलाल भाई व् माता सौभाग्या बेन की फोटो लगी है, और मन्दिर के बाहर एक तरफ संगमरमर के चबूतरे पर दो खुबसुरत छतरी के अंदर दोनों की सफ़ेद पत्थर की बनी मूर्तियाँ बरबस ही आकर्षित करती है l अंदर से मन्दिर के कपाट बंद हो चुके थे, सो बाहर से जितना देख सकते थे, देख कर इस्कॉन गांठिया के लिए प्रस्थान कर गये “ इस्कॉन कोई मन्दिर “ नहीं बल्कि एक बहुत बड़ी चेन है, जो मणि लक्ष्मी मन्दिर से सारंगपुर जाते हुए गुरुदेश्वर के फेडरा में स्थित है, जहाँ कठियावाड़ी खाने के साथ ही वहां का गांठिया, खाखड़ा, फाफडा और जलेबी बहुत मशहूर है इस दुकान का उद्घाटन मोदी जी ने किया था जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे
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माता-पिता : इन्हें ही समर्पित है मणिलक्ष्मी तीर्थ |
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लाइब्रेरी : मणिलाल भाई व् सौभाग्या बेन
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दो चित्र अलग-अलग रौशनी में
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बहुत भव्य निर्माण : दिन में देखने की तमन्ना अधूरी रह गई
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पत्थर पर कमाल की कारीगरी
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मधु जी के पीछे फवारा नजर आ रहा है
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सफेद संगमरमर पर बहुत महीन नक्काशी
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पिता श्री मणि लाल भाई
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माता श्रीमति सौभाग्या बेन
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प्रवेशद्वार : कुछ-कुछ प्रेम मन्दिर की तरह
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बहुत बारीक़ जाली
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हर पत्थर को हीरे की तरह ही तराशा गया है
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पत्थर से बना लैम्प
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यह चित्र गूगल से लिया गया है
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fedra : इस्कॉन गाठिया की ब्रांच
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गाठिया
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फाफडा
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जलेबी
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